राज्यपाल के कमलनाथ को लिखे दो पत्र चर्चा में
राज्यपाल की पहली चिट्ठी 14 मार्च को लिखी गई, जिसमें सरकार से फ्लोर टेस्ट के लिए कहा गया। 16 मार्च को उन्होंने दूसरी चिट्ठी तब लिखी, जब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट नहीं कराया गया। इस पत्र में राज्यपाल ने सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा- ‘‘अगर 17 अगर को फ्लोर नहीं कराया तो माना जाएगा कि सरकार अल्पमत में है।’’ राज्यपाल की नाराजगी सार्वजनिक होने पर मुख्यमंत्री ने मुलाकात की और पत्र जारी किया।
ऐसे चला चिट्ठी वॉर
16 मार्च सुबह 10 बजे: कमलनाथ ने राज्यपाल से कहा- स्पीकर के काम में दखल देना राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं
कमलनाथ ने कहा- ‘‘40 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने हमेशा मर्यादाओं का पालन किया, आपके 16 मार्च के पत्र से दुखी हूं, जिसमें आपने मुझ पर मर्यादाओं का पालन नहीं करने का आरोप लगाया। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी। फिर भी यदि आपको ऐसा लगा है तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। विधायकों के दबाव से मुक्त होने पर ही बहुमत परीक्षण होगा। आपने 14 मार्च को मुझे लिखे पत्र में यह मान लिया है कि मेरी सरकार ने बहुमत खो दिया है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने भाजपा से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ऐसा माना। विधानसभा की कार्यप्रणाली से संबंधित बातों पर मुझसे अपेक्षा की गई है, जबकि यह सब विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है। उनके कार्य में हस्तक्षेप करना राज्यपाल के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। विधानसभा राज्यपाल के नीचे काम नहीं करती। कुल मिलाकर राज्यपाल विधानसभा के लोकपाल की तरह काम नहीं कर सकते।’’
16 मार्च शाम 5 बजे: राज्यपाल ने कमलनाथ से कहा- अफसोस! आपने फ्लोर टेस्ट में आनाकानी की
राज्यपाल ने चिट्ठी में लिखा- ‘‘14 मार्च को लिखे गए मेरे पत्र के जवाब में आपका पत्र मिला। खेद है आपके पत्र का भाव/भाषा संसदीय मर्यादाओं के अनुकूल नहीं है। मैंने 16 मार्च को विश्वास मत प्राप्त करने के लिए लिखा था। सोमवार को सत्र प्रारंभ हुआ, लेकिन विश्वास मत की कार्यवाही प्रारंभ नहीं हुई। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के जिस निर्णय का हवाला दिया गया, वह वर्तमान परिस्थितियों पर लागू नहीं होता। यह खेद की बात है कि आपने मेरे द्वारा आपको दी गई समयावधि में बहुमत सिद्ध करने की बजाय पत्र लिखकर विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने में अपनी असमर्थता व्यक्त की/आनाकानी की, जिसका कोई भी औचित्य और आधार नहीं है। आपने फ्लोर टेस्ट नहीं कराने के जो कारण दिए हैं, वे आधारहीन और अर्थहीन हैं। आप संवैधानिक और लोकतंत्रीय मान्यताओं का सम्मान करते हुए 17 मार्च तक विधानसभा में फ्लाेर टेस्ट करवाएं और बहुमत सिद्ध करें। अन्यथा यह माना जाएगा कि वास्तव में आपको विधानसभा में बहुमत प्राप्त नहीं है।’’
17 मार्च सुबह 11 बजे: कमलनाथ ने राज्यपाल से कहा- बंदी विधायकों को आजाद होने दीजिए
कमलनाथ ने 13 घंटे में लिखी दूसरी चिट्ठी में कहा- ‘‘आपने यह मान लिया है कि मेरी सरकार बहुमत खो चुकी है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने भाजपा से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ऐसा माना है। भाजपा ने कांग्रेस के 16 विधायकों को बंधक बना रखा है। भाजपा के नेता इन विधायकों पर दवाब डालकर उनसे बयान दिलवा रहे हैं। प्रदेश के बंदी विधायकों को स्वतंत्र होने दीजिए। 5-7 दिन खुले वतावारण में बिना दबाव के घर में रहने दीजिए ताकि वो स्वतंत्र मन से अपना निर्णय ले सकें। आपने कहा है कि 17 मार्च तक फ्लोर टेस्ट नहीं कराने पर यह माना जाएगा कि मुझे वास्तव में बहुमत प्राप्त नहीं है, यह पूरी तरह से आधारहीन और असंवैधानिक है।’